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कुदरत का इंसाफ भी बेमिसाल है
हर कर्मो का यहाँ हिसाब है।

तभी तो कैद में रहने वाले रिहा हो गये
      ओर उन्हें कैद में रखने वाले
         खुद कैद हो गये।ओर पढे
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तेरे जिक्र बिना केसे जिंदगी की कहानी लिखू.....

तुझे इश्क लिखू वफ़ा लिखू या फिर 
अपनी जिंदगानी लिखू।ओर पढे
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मना लेना तू भी खुशिया सारी......
                बस
एक दफ़ा इस लकीर को सीधा तो हो
            जाने दे।ओर पढे

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महफ़िल में जो हमे दाद देने में कतराते
                         है।
सुना है तन्हाइयो में वो मेरी शायरी 
             गुनगुनाते है......ओर पढे
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रात एक ख्वाब को हकीकत होते
                देखा
तुम्हे सोचा तुम्हे देखा तुम्हे चाहा तुम्हे
           पाया।ओर पढे
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हर शख्स इस संसार मे गमो में रोया है
जो शख्स गमो से मुक्त है वो ध्यान में खोया है।ओर पढे
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हर कोई मिलता हैं यहाँ पहन के सच
             का नक़ाब
कैसे पहचाने कोई कौन है अच्छा कौन
            खराब।ओर पढे
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काश तुम समझ सकते मोहब्बत के 
                 उसूलो को
किसी की सासो में समाकर उसे
               तन्हा नही करते।ओर पढे
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क्या बताऊँ तुम्हे की कितनी खुशिया
                  छीन
कर ये गम मेरे हिस्से लिखे गए हैं
दुवा करना तुम्हारे हक में वो फैसले
             ना लिखे जाए।ओर पढे
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गुस्से से फ़ोन रख दिया मेने
फिर फोन करके माँ बोली......
वो गलती से कट गया था मुझसे।ओर पढे
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शब्द और सोच दूरिया बढ़ा देते है
            क्यों कि
कभी हम समझ नही पाते........
ओर कभी हम समझा नही पाते।ओर पढे
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कैसे प्यार करू में तुझसे ए जिंदगी
तेरी हर सुबह मेरी उम्र कम करती हैं।
ओर पढे
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मेरी खामोशी सुन लो आज शब्द खत्म हो गये है
क्या करे बहुत तन्हा हो गये है हो तुम
पास है ये अहसास पर अब जिन्दगी के मायने खो गये है।ओर पढे
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एक तू मिल जाता इतना काफी था
सारि दुनिया के तलबगार नही थे हम।ओर पढे
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महसूस करोगे तो कोरे कागज पर भी नजर आएंगे हम।
हम अल्फाज है तेरे हर लफ्ज में ढल जायेगे हम।ओर पढे
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हम भी वही होते है रिश्ते भी वही होते है
ओर रास्ते भी वही होते है बदलता है
तो बस 
समय,एहसास, ओर नजरिया।ओर पढे
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हम तो आज भी रिश्तो को वैसे ही
            चाहते है।
जैसे सूखा पेड़ बारिश का तलबगार
           होता हैं।ओर पढे
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ये इश्क़ के रिश्ते है जाना.....यहा कोई सबूत नहीं होते है
बरसो से.......बस यकीन पर ही तो टिके है......ओर पढे

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माँ तेरे दूध का हक मुझसे अदा क्या होगा
तू है नराज तो खुश मुझसे खुदा क्या होगा।ओर पढे
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झूठ बोलते है वो जो कहते है
हम सब मिट्टी से बने हैं
में कई अपनो से वाकिफ हु
जो पत्थर के बने हैं।ओर पढे
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