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दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना चाहिए
इसमें कोई बुराई नही है।ओर पढे।
                               चाणक्य नीति।
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हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई  स्वार्थ होता हैं 
ऐसी कोई मित्रता नही जिसमें स्वार्थ ना हो। यह कड़वा सच है।ओर पढे।
                               चाणक्य नीति।
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जो मनुष्य अपने वर्ग के लोगो को छोड़कर
दूसरे वर्ग का सहारा लेता हैं
वह उसी प्रकार स्वयं नष्ट हो जाता हैं
जैसे अधर्म का आश्रय लेने वाला राजा।ओर पढे
                               चाणक्य नीति।
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जिस व्यक्ति के पास पैसा है
        लोग स्वयं ही उसके मित्र बन जाते हैं।ओर पढे।
                               चाणक्य नीति।
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कामयाब होने के लिए अच्छे मित्रो की जरूरत होती है
ओर
ज्यादा कामयाब होने के लिए अच्छे शत्रुओं की आवश्यकता होती हैं।ओर पढे।
                               चाणक्य नीति।
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       जो धैर्यवान नही है
उसका न वर्तमान हैं न भविष्य।ओर पढे।                       चाणक्य नीति।
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जो शक्ति न होते हुए भी मन से हार नही मानता है,
उसको दुनिया की कोई ताकत परास्त नही कर सकती।ओर पढे
                               चाणक्य नीति।
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मुझे वह दौलत नही चाहिये जिसके लिए कठोर यातना सहनी पड़े,

या सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े।ओर पढे।
                               चाणक्य नीति।
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शिक्षा इंसान की सबसे अछि मित्र होती हैं।
एक शिक्षित इंसान हर जगह समान पाता है।
शिक्षा सुन्दरता को भी पराजित कर सकती हैं।ओर पढे।
                                चाणक्य नीति

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जिस से प्रेम होता है उसी से भय भी होता हैं।
     प्रेम ही सारे दुःखो का मूल हैं।

अतः प्रेम बन्धनों को तोड़कर सुखपूर्वक रहना चाहिए।ओर पढे।
                             चाणक्य नीति।
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कुँए में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती हैं तो भर कर बाहर आती हैं

जीवन का भी यही गणित हैं
जो झुकता हैं वह प्राप्त करता है।

दादा गिरी तो हम मरने के बाद भी करेंगे।
लोग पैदल चलेगे ओर हम कन्धों पर।ओर पढे।
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