कुछ बेटियों को मेरी बात का बुरा जरूर लगेगा!पर सच हैं!जिन बेटियों से घर का काम नही होता!उनको कहीं पर भी जीवन में उचित सम्मान ओर उचित स्थान नही मिलता-।                                
एक वकील साहब ने अपने बेटे का रिश्ता तय किया....
कुछ दिनों बाद वकील साहब होने वाले समधी के घर गए!
तो देखा कि होने वाली समधन खाना बना रही थीं!सभी बच्चे और होने वाली बहू टी वी देख रहे थे!वकील साहब ने चाय पी कुशल जाना और चले आये!
एक माह बाद वकील साहब समधी जी के घर फिर गए!
देखा भावी समधन जी झाड़ू लगा रहीं थी!बच्चे पढ़ रहे थे!
और होने वाली बहू सो रही थी!वकील साहब ने खाना
खाया!और चले आये!कुछ दिन बाद वकील साहब किसी काम से फिर होने वाले समधी जी के घर गए!घर में जाकर देखा!होने वाली समधन बर्तन साफ़ कर रही थी!बच्चे टीवी देख रहे थे!और होने वाली बहू खुद के हाथों में नेलपेंट लगा रही थी!
वकील साहब ने घर आकर!गहन सोच-विचार कर लड़की
वालों के यहाँ खबर पहुचाई कि हमें ये रिश्ता मंजूर नहीं है!
...कारण पूछने पर वकील साहब ने कहा कि मैं होने वाले
समधी के घर तीन बार गया!तीनों बार सिर्फ समधन जी ही घर के काम काज में व्यस्त दिखीं!एक भी बार भी मुझे होने वाली बहू घर का काम काज करते हुए नहीं दिखी!जो बेटी अपने सगी माँ को हर समय काम में व्यस्त पा कर भी उन की मदद करने का न सोचे!
उम्र दराज माँ से कम उम्र की जवान हो कर भी स्वयं की
माँ का हाथ बटाने का जज्बा न रखे!वो किसी और की
माँ और किसी अपरिचित परिवार के बारे में क्या!
सोचेगी!मुझे अपने बेटे के लिए एक बहू की आवश्यकता है!किसी गुलदस्ते की नहीं!जो किसी फ्लावर पाटॅ में सजाया
जाये!
        इसलिये सभी माता-पिता को चाहिये!कि वे इन छोटी
छोटी बातों पर अवश्य ध्यान दें!
बेटी कितनी भी प्यारी क्यों न हो उससे घर का काम
काज अवश्य कराना चाहिए!
समय-समय पर डांटना भी चाहिए! जिससे ससुराल में!
ज्यादा काम पड़ने या डांट पड़ने पर उसके द्वारा गलत करने!
की कोशिश ना की जाये!हमारे घर बेटी पैदा होती है!हमारी जिम्मेदारी बेटी से
                        बहू बनाने की है!
अगर हमने अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से नहीं निभाई!
बेटी में बहू के संस्कार नहीं डाले तो इसकी सज़ा बेटी को
तो मिलती है!और माँ बाप को मिलती हैं!जिन्दगी भर
गालियाँ!
हर किसी को सुन्दर सुशील बहू चाहिए! लेकिन भाइयो!
जब हम अपनी बेटियों में एक अच्छी बहु के संस्कार डालेंगे!
तभी तो हमें संस्कारित बहू मिलेगी!
ये कड़वा सच शायद कुछ लोग न बर्दाश्त कर पाएं!
     ----- लेकिन पढ़ें और समझें बस इतनी इलतिजा!

          वृद्धाआश्रम में माँ बाप को देखकर सब लोग बेटो को ही
कोसते हैं!लेकिन ये कैसे भूल जाते हैं!कि उन्हें वहां भेजने में
किसी की बेटी का भी अहम रोल होता है!वरना बेटे अपने
माँ बाप को शादी के पहले वृद्धाश्रम क्यों नही भेजते-------!
गणेश चतुर्थी महोत्सव : 22 अगस्त
ब्रह्मवैवर्त पुराण , गणपति खंड : 13.34 के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेश उपासना का विशेष महत्त्व है । इस दिन गणेशजी की प्रसन्नता के लिए इस गणेश गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए : 
1. महाकर्णाय विद्महे , वक्रतुण्डाय धीमहि , तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ।
 श्रीगणेशजी का अन्य मंत्र , जो समस्त कामनापूर्ति करनेवाला एवं सर्व सिद्धिप्रद है : 
2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गणेश्वराय ब्रह्मरूपाय चारवे । सर्वसिद्धिप्रदेशाय विघ्नेशाय नमो नमः
गणेश महोत्सव की तिथियां

1- गणेश चतुर्थी व्रत- 22 अगस्त शनिवार

2- ऋषि पंचमी 23 अगस्त - रविवार

3- मोरछठ-चम्पा सूर्य, बलदेव षष्ठी 24 अगस्त - सोमवार

4- संतान सप्तमी 24 अगस्त - सोमवार

5- राधाष्टमी -25 अगस्त - मंगलवार

6-  श्रीमहालक्ष्मी व्रत आरम्भ, ऋषि दधीचि जन्म 26 अगस्त - बुधवार

7- अदुख नवमी (उदासीन)  27 अगस्त - गुरुवार

8-  तेजा दशमी, रामदेव जयंती 28 अगस्त - शुक्रवार 

9- पदमा डोल ग्यारस 29 अगस्त - शनिवार
वामन अवतार 

10- भुवनेश्वरी जयंती, प्रदोष व्रत 30 अगस्त - रविवार

1 सितम्बर - अनन्त चतुर्दशी, गणपति विसर्जन सोमवार

गणपति की वैदिक मंत्रों से स्थापना एवं पूजन विधि अगले लेख में देखें।

अटल बिहारी वाजपेई
आओ फिर से दिया जलाएँ
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल
वर्त्तमान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएँ।
आओ फिर से दिया जलाएँ।

प्रशासक समिति

जय सनातन:-जय पञ्चाङ्ग

 आज का हिन्दू पंचांग

हिन्दी तिथि- भाद्रपद,कृष्ण,१२ (२:२० के बाद)
दिनांक 15 अगस्त 2020
दिन - शनिवार
विक्रम संवत - 2077
शक संवत - 1942
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - वर्षा
मास - भाद्रपद
पक्ष - कृष्ण
तिथि - एकादशी दोपहर 02:20 तक तत्पश्चात द्वादशी*
नक्षत्र - मॄगशिरा सुबह 06:36 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
योग - हर्षण सुबह 09:09 तक तत्पश्चात वज्र*
⛅ *राहुकाल - सुबह 09:19 से सुबह 10:55 तक* 
⛅ *सूर्योदय - 06:18* 
⛅ *सूर्यास्त - 19:07* 
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - अजा एकादशी, स्वतंत्रता दिवस*
 💥 *विशेष -*
*🙏पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी का जन्मदिन (AIM FOR SEVA संस्थापक)

हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है lराम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।
 आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
 एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।
 एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।
 जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
 ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' (ब्रह्म पुराण')
 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण')

 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)

 विष्णुपदी संक्रांति 
 जप तिथि : 16 अगस्त 2020 रविवार को ( विष्णुपदी संक्रांति )
पुण्य काल सुबह दोपहर 12:43 से सूर्यास्त तक |
  विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है | – (पद्म पुराण , सृष्टि खंड)
        

 शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता लाने हेतु 
 सोते समय किसी सफेद कागज में थोडा-सा कपूर रखें और प्रात: उसे घर से बाहर जला दें | इससे घर में शांति के साथ आर्थिक सम्पन्नता आती है |

 अजा एकादशी
  यह व्रत सब पापों का नाश करनेवाला है | इसका माहात्म्य पढ़ने व सुनने से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है |

 इससे आपके घर में सुख-शांति की वृद्धि होगी
  संध्या के समय घर में किसीको सोना नहीं चाहिए | उस समय घर के प्रत्येक कक्ष में कुछ देर के लिए रोशनी अवश्य कर दें | यदि सम्भव हो तो बीमार व्यक्ति भी भले बिस्तर पर ही सही, निद्रा त्यागकर बैठ जाय | सभी लोग मन-ही-मन भगवन्नाम का सुमिरन करें | इससे घर में सुख-शांति की वृद्धि होती है |

कन्हैया का पुत्र धर्म  

वृन्दावन के एक संत की कथा है. वे श्री कृष्ण की आराधना करते थे. उन्होंने संसार को भूलने की एक युक्ति की. 

मन को सतत श्री कृष्ण का स्मरण रहे, उसके लिए महात्मा ने प्रभु के साथ ऐसा सम्बन्ध जोड़ा की मै नन्द हुँ, 

बाल कृष्ण लाल मेरे बालक है, वे लाला को लाड़ लड़ाते, यमुना जी स्नान करने जाते तो लाला को साथ ले कर जाते. 

भोजन करने बैठते तो लाला को साथ लेकर बैठते. ऐसी भावना करते की कन्हैया मेरी गोद में बैठा है.

कन्हैया मेरे दाढ़ी खींच रहा है. श्री कृष्ण को पुत्र मानकर आनद करते.

श्री कृष्ण के उपर इनका वात्सल्य भाव था.

महात्मा श्री कृष्ण की मानसिक सेवा करते थे. 

सम्पूर्ण दिवस मन को श्री कृष्ण लीला में तन्मय रखते, जिससे मन को संसार का चिंतन करने का अवसर ही ना मिले. 

निष्क्रय ब्रह्म का सतत ध्यान करना कठिन है, परन्तु लीला विशिष्ट ब्रह्म का सतत ध्यान हो सकता है, 

महात्मा परमात्मा के साथ पुत्र का सम्बन्ध जोड़ कर संसार को भूल गये,

परमात्मा के साथ तन्मय हो गये, श्री कृष्ण को पुत्र मानकर लाड लड़ाने लगे.

महात्मा ऐसी भावना करते की कन्हैया मुझसे केला मांग रहा है, 

बाबा ! मुझे केला दो, ऐसा कह रहा है. महात्मा मन से ही कन्हैया को केला देते. 

महात्मा समस्त दिवस लाला की मानसिक सेवा करते और मन से भगवान को सभी वस्तुए देते.

कन्हैया तो बहुत भोले है. मन से तो वो भी प्रसन्न हो जाते है.

महात्मा कभी कभी शिष्यों से कहते की इस शरीर से गंगा स्नान कभी हुआ नहीं, वह मुझे एक बार कराना है. शिष्य कहते की काशी पधारो.

महात्मा काशी जाने की तैयारी करते परन्तु वात्सल्य भाव से मानसिक सेवा में तन्मय हुए की कन्हैया कहने लगते 

बाबा मै तुम्हारा बालक हुँ, छोटा सा हुँ. मुझे छोड़ कर काशी नहीं जाना. 

इस प्रकार महात्मा सेवा में तन्मय होते, उस समय उनको ऐसा आभास होता था की मेरा लाला जाने की मनाही कर रहा है.

मेरा कान्हा अभी बालक है. मैं कन्हैया को छोड़कर यात्रा करने कैसे जाऊ ? मुझे लाला को छोड़कर जाना नहीं.

महात्मा अति वृद्ध हो गये. महात्मा का शरीर तो वृद्ध हुआ परन्तु उनका कन्हैया तो छोटा ही रहा. वह बड़ा हुआ ही नहीं !

उनका प्रभु में बाल - भाव ही स्थिर रहा और एक दिन लाला का चिन्तन करते - करते वे मृत्यु को प्राप्त हो गये.

शिष्य कीर्तन करते- करते महात्मा को श्मशान ले गये. अग्नि - संस्कार की तैयारी हुई...

इतने ही में एक सात वर्ष का अति सुंदर बालक कंधे पर गंगाजल का घड़ा लेकर वहां आया. 

उसने  शिष्यों से कहा - ये मेरे पिता है, मै इनका मानस - पुत्र हुँ, पुत्र के तौर पर अग्नि - संस्कार करने का अधिकार मेरा है. 

मै इनका अग्नि-संस्कार करूँगा. 

पिता की अंतिम इच्छा पूर्ण करना पुत्र का धर्म है, मेरे पिता की गंगा-स्नान करने की इच्छा थी परन्तु मेरे कारण ये गंगा-स्नान करने नहीं जा सकते थे. 

इसलिए मै यह गंगाजल लाया हुँ, पुत्र जिस प्रकार पिता की सेवा करता है, इस प्रकार बालक ने महात्मा के शव को गंगा-स्नान कराया. 

संत के माथे पर तिलक किया, पुष्प की माला पहनाई और अंतिम वंदन करके अग्नि-संस्कार किया, 

सब देखते ही रह गये, अनेक साधु-महात्मा थे परन्तु किसी की बोलने की हिम्मत ही ना हुई. 

अग्नि- संस्कार करके बालक एकदम अंतर्ध्यान हो गया. उसके बाद लोगो को ख्याल आया की महात्मा के तो पुत्र था ही नही..!!

बाल कृष्ण लाल ही तो महात्मा के पुत्र रूप में आये थे.

महात्मा की भावना थी की श्री कृष्ण मेरा पुत्र है, परमात्मा ने उनकी भावना पूरी की,

परमात्मा के साथ जीव जैसा सम्बन्ध बांधता है, वैसा ही सम्बन्ध से परमात्मा उसको मिलते है.

जय श्रीराधे कृष्णा

जीवन के रंग

 मोहन एक न्यूज़ पेपर की दुकान चलाता था एक बुजुर्ग लगभग 60 साल के रोज उसकी दुकान पर आते तकरीबन सभी न्यूज़ पेपर उलट पलटकर देखते,

 फिर एक पेपर खरीदकर चले जाते मोहन को ये बडा अटपटा सा लगता ।
आखिर एकदिन मोहन ने बुजुर्ग से पूछ लिया -बाबूजी आप कया खोजते रहते हो रोज आकर इन पेपर मे 
,बुजुर्ग बोले-बेटा अपनी तस्वीर ....

मोहन-ओह तो आपने छपने भेजी हे कौन से पेपर मे...
बुजुर्ग बोले- नही मेरे बेटे इस आस मे शायद मेरे बेटे बहूओ को मेरी याद आये ओर तलाश शुदा के कालम मे...वो मेरी तस्वीर छाप मुझे वापस घर बुला ले ...!!

 एक बार बहू ने अपने पालतू कुत्ते का भी ऐसे ही तलाश शुदा कालम मे इशतहार दिया था....कहकर रोने लगे....

मोहन ने जब जोर देकर पूछा तो बुजुर्ग बोले -भूरेलाल नाम है उनका शहर मे बडी दुकान थी कपडे की दो बेटे है पढाया लिखाया समझदार बनाया।

 फिर पत्नी के कहने पर पहले कारोबार ओर फिर घर उनके नाम कर दिया बस सभी चीजों पर कब्जा किए बहू बेटों के बर्ताव मे होते अनदेखियो और बदतमीजी से मेरी पत्नी चल बसी ।

ओर फिर कुछ समय बाद दोनों बेटों ने मुझे इस शहर मे स्टेशन पर छोड़ दिया की आप यहां रुकिए हम अभी आते है... 

मगर वो फिर कभी नही आये शायद वो मुझे यूं ही मरने को छोड़ गए 5 दिनो तक भूखे रहकर मैंने उनकी राह देखी 

मगर फिर सबकुछ समझ गया और यूं ही भटकते इस वृद्धआश्रम आ पहुंचा ओर यहां लगभग 2साल हो गए मगर आज भी दिल करता हे शायद जैसे अपने पालतू कुत्ते के लिए विज्ञापन दिया था।

 बेटे बहुओ ने हो सकता हे मेरी तस्वीर भी दी हो की पापा वापस आ जाओ....

कहकर रोने लगे,सबकुछ सुनकर मोहन बोला-मे आपसे एक बात कहूं-मे गांवसे शहर पैसे कमाने आया हूं अपने माता पिता ओर छोटी बहन को छोडकर... 

मुझे उनकी कमी हर वक्त खलती है जैसे आपको अपने बेटोंकी तो कयूं ना आजसे आप मेरे पास मेरे साथ रहे आपको बेटा ओर मुझे पिता का प्यार मिल जाएगा, 

बुजुर्ग ये सुनकर हैरान थे मगर फिर खडे हुए और मोहन को गले लगा लिया इसके बाद मोहन और बुजुर्ग साथ रहने लगे।

दोस्तों!!
 ये भी एक रंग है संसार का कोई बेटों के होते हुए भी परेशान है ओर और कोई माता पिता की ममता ना मिलने से खुदको बदनसीब समझता है 

अपने माता पिता को प्यार और सम्मान दीजिए घरों मे बरकत कुत्ते बिल्ली के पालने से नही मां बाप की सेवा करने से होती है ।

कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट करे या और भी अच्छी कहानियां पढ़ने के लिए मुझे लाइक जरूर करें।ओर पढ़े।
औरत को आईने में यूँ उलझा दिया गया
बखान करके हुश्न का बहला दिया गया

न हक़ दिया जमीन का न घर कहीं दिया
गृह स्वामिनी के नाम का रुतबा दिया गया
छूती रही जब पाँव परमेश्वर पति को कह
फिर कैसे इनको घर की गृह लक्ष्मी बना दिया

चलती रहे चक्की और जलता रहे चूल्हा
बस इसीलिए औरत को अन्नपूर्णा बना दिया

न बराबर का हक मिले न चूं ही कर सके
इसीलिए इनको पूज्य देवी दुर्गा बना दिया

यह डॉक्टर इंजीनियर सैनिक भी हो गईं
पर घर के चूल्हों ने उसे औरत बना दिया

चाँदी सोने की हथकड़ी नकेल बेड़ियाँ
कंगन पाजेब नथनिया जेवर बना दिया

व्यभिचारी आदमी जब लार रोक न सका
श्रृंगार साज बस्त्र पर तोहमत लगा दिया

खुद नंग धड़ंग आदमी घूमता है रात दिन
औरत की टांग क्या दिखी नंगा बता दिया
नारी ने जो ललकारा इस दानव प्रवर्ति को
जिह्वा निकाल रक्त प्रिय काली बना दिया

नौ माह खून सींच के पैदा जिसे किया
बेटे को नाम बाप का चिपका दिया.....
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